सोया को सुपरफ़ूड कहा जाता है. क्यों कि इसे प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसे अक्सर रेड मीट के विकल्प के तौर पर खाया जाता है. क्योंकि रेड मीट को दिल की बीमारियों और कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. इस वजह से पश्चिमी देशों में आजकल लोग सोया उत्पाद को ही प्रोटीन का अच्छा स्रोत मानने लगे हैं. इसमें फैट भी कम ही होता है. यही वजह है कि सोया खाने वालों को दिल की बीमारियां होने की आशंका कम हो जाती है. इसमें प्रोटीन, अनसैचुरेटेड फैट, विटामिन बी, फ़ाइबर, आयरन, कैल्शियम और ज़िंक जैसे इंसान की सेहत के लिए ज़रूरी तत्व पाए जाते हैं.
लेकिन कुछ लोगों ने इसे लेकर आशंकाएं भी जताई हैं. कहा जा रहा है कि यह हमारे हारमोन पर असर डालता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवन्स पाये जाते हैं. इनमें महिलाओं के हारमोन ओस्ट्रोजेन जैसे गुण होते हैं. सोया में पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स, ओस्ट्रोजेन जैसा काम करते हैं. यह शरीर में ओस्ट्रोजेन से जुड़ाव रखने वाले तत्वों से गठजोड़ करने लगते हैं. इसी वजह से कई लोग यह आशंका जताते हैं कि ज़्यादा सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर हो सकता है.
हालांकि वैज्ञानिकों ने पिछले एक दशक में आइसोफ्लेवन्स को लेकर बहुत रिसर्च की है. फिर भी इस सवाल का सीधा जवाब नहीं मिला है कि सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर हो सकता है। कई रिसर्च में तो यह बात सामने आई है कि सोया असल में कैंसर का कारण नहीं, बल्कि इससे बचाता है. लेकिन यह बात भी पक्के तौर पर कहने से विशेषज्ञ बचते हैं. अमरीका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर फैंग फैंग झैंग ने ब्रेस्ट कैंसर की शिकार 6 हज़ार अमरीकी महिलाओं पर रिसर्च की. उन्होंने पाया कि अगर स्तन कैंसर की शिकार महिलाएं अपने खान-पान में सोया का प्रयोग ज़्यादा करती हैं, तो उनके ब्रेस्ट कैंसर से मरने की आशंका 21 फ़ीसद तक कम हो जाती है. सोया के कितने फ़ायदे होते हैं, इस बारे में विशेषज्ञ पक्के दावे करने से बचते हैं. लेकिन अगर सोया से ब्रेस्ट कैंसर कम होता है. तो, इसकी वजह इसमें पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स हो सकते हैं. क्योंकि यह शरीर की कोशिकाओं में एपॉप्टोसिस की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं. ऐसा तब होता है, जब किसी कोशिका का डीएनए कैंसर की वजह से विकृत हो जाता है, तो कोशिका ख़ुद को ख़त्म कर लेती है, ताकि ज़ख़्मी कोशिका से कैंसर न बने.
प्रयोगशालाओं में सोया की वजह से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को बढ़ते देखा गया है. यह प्रयोग वर्ष 2001 में चूहों पर किए गए थे. लेकिन, वर्ष 2010 में हुए एक प्रयोग में देखा गया कि सोया की वजह से ब्रेस्ट कैंसर पर कोई ख़ास असर नहीं होता.वैज्ञानिक इसका कारण सोया में पाए जाने वाले तत्व आइसोफ्लेवन्स को मानते हैं. जब हम सोया खाते हैं, तो इनमें मौजूद आइसोफ्लेवन्स या तो अल्फा ओस्ट्रोजेन रिसेप्टर से जुड़ते हैं, या फिर बीटा से. अल्फा से जुड़ने वाले आइसोफ्लेवन्स कैंसर को बढ़ावा देते हैं. लेकिन, देखा यह गया है कि आइसोफ्लेवन्स अक्सर ओस्ट्रोजेन के बीटा रिसेप्टर से ही गठजोड़ करते हैं. इसीलिए इनकी वजह से कैंसर बढ़ने की आशंका कम हो जाती है.
सोया खाने का फ़ायदा यह भी है कि इस में ख़राब फैट यानी सैचुरेटेड फैट कम होते हैं. तो, यह नुक़सान भी कम करता है. एक रिसर्च में यह भी देखा गया है कि सोया, पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की आशंका को भी कम करता है. अमरीका की इलिनॉय यूनिवर्सिटी की कैथरीन एपलगेट ने इस बारे में काफ़ी रिसर्च की है. एपलगेट का कहना है कि सोया प्रोस्टेट कैंसर के विकास को रोकने में मददगार होता है.सोया आप किस तरह से लेते हैं, इसका भी बहुत फ़र्क़ पड़ता है. आप अगर सीधे सोयाबीन खाते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स की मात्रा ज़्यादा होती है. पर, आप सोया मिल्क लेते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स बहुत ही कम रह जाते हैं.
कुल मिलाकर, हम यह कह सकते हैं कि सोया से नुक़सान होता है, यह राय क़ायम करना सही नहीं होगा. पिछले कुछ दशकों में सोया पर बहुत सी रिसर्च हुई हैं. इनमें से एक मे भी कोई नकारात्मक बातें पूरी तरह से सही नहीं साबित हुई हैं.
लेकिन कुछ लोगों ने इसे लेकर आशंकाएं भी जताई हैं. कहा जा रहा है कि यह हमारे हारमोन पर असर डालता है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवन्स पाये जाते हैं. इनमें महिलाओं के हारमोन ओस्ट्रोजेन जैसे गुण होते हैं. सोया में पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स, ओस्ट्रोजेन जैसा काम करते हैं. यह शरीर में ओस्ट्रोजेन से जुड़ाव रखने वाले तत्वों से गठजोड़ करने लगते हैं. इसी वजह से कई लोग यह आशंका जताते हैं कि ज़्यादा सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर हो सकता है.
हालांकि वैज्ञानिकों ने पिछले एक दशक में आइसोफ्लेवन्स को लेकर बहुत रिसर्च की है. फिर भी इस सवाल का सीधा जवाब नहीं मिला है कि सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर हो सकता है। कई रिसर्च में तो यह बात सामने आई है कि सोया असल में कैंसर का कारण नहीं, बल्कि इससे बचाता है. लेकिन यह बात भी पक्के तौर पर कहने से विशेषज्ञ बचते हैं. अमरीका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर फैंग फैंग झैंग ने ब्रेस्ट कैंसर की शिकार 6 हज़ार अमरीकी महिलाओं पर रिसर्च की. उन्होंने पाया कि अगर स्तन कैंसर की शिकार महिलाएं अपने खान-पान में सोया का प्रयोग ज़्यादा करती हैं, तो उनके ब्रेस्ट कैंसर से मरने की आशंका 21 फ़ीसद तक कम हो जाती है. सोया के कितने फ़ायदे होते हैं, इस बारे में विशेषज्ञ पक्के दावे करने से बचते हैं. लेकिन अगर सोया से ब्रेस्ट कैंसर कम होता है. तो, इसकी वजह इसमें पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स हो सकते हैं. क्योंकि यह शरीर की कोशिकाओं में एपॉप्टोसिस की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं. ऐसा तब होता है, जब किसी कोशिका का डीएनए कैंसर की वजह से विकृत हो जाता है, तो कोशिका ख़ुद को ख़त्म कर लेती है, ताकि ज़ख़्मी कोशिका से कैंसर न बने.
प्रयोगशालाओं में सोया की वजह से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को बढ़ते देखा गया है. यह प्रयोग वर्ष 2001 में चूहों पर किए गए थे. लेकिन, वर्ष 2010 में हुए एक प्रयोग में देखा गया कि सोया की वजह से ब्रेस्ट कैंसर पर कोई ख़ास असर नहीं होता.वैज्ञानिक इसका कारण सोया में पाए जाने वाले तत्व आइसोफ्लेवन्स को मानते हैं. जब हम सोया खाते हैं, तो इनमें मौजूद आइसोफ्लेवन्स या तो अल्फा ओस्ट्रोजेन रिसेप्टर से जुड़ते हैं, या फिर बीटा से. अल्फा से जुड़ने वाले आइसोफ्लेवन्स कैंसर को बढ़ावा देते हैं. लेकिन, देखा यह गया है कि आइसोफ्लेवन्स अक्सर ओस्ट्रोजेन के बीटा रिसेप्टर से ही गठजोड़ करते हैं. इसीलिए इनकी वजह से कैंसर बढ़ने की आशंका कम हो जाती है.
सोया खाने का फ़ायदा यह भी है कि इस में ख़राब फैट यानी सैचुरेटेड फैट कम होते हैं. तो, यह नुक़सान भी कम करता है. एक रिसर्च में यह भी देखा गया है कि सोया, पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की आशंका को भी कम करता है. अमरीका की इलिनॉय यूनिवर्सिटी की कैथरीन एपलगेट ने इस बारे में काफ़ी रिसर्च की है. एपलगेट का कहना है कि सोया प्रोस्टेट कैंसर के विकास को रोकने में मददगार होता है.सोया आप किस तरह से लेते हैं, इसका भी बहुत फ़र्क़ पड़ता है. आप अगर सीधे सोयाबीन खाते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स की मात्रा ज़्यादा होती है. पर, आप सोया मिल्क लेते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स बहुत ही कम रह जाते हैं.
कुल मिलाकर, हम यह कह सकते हैं कि सोया से नुक़सान होता है, यह राय क़ायम करना सही नहीं होगा. पिछले कुछ दशकों में सोया पर बहुत सी रिसर्च हुई हैं. इनमें से एक मे भी कोई नकारात्मक बातें पूरी तरह से सही नहीं साबित हुई हैं.
